वेपथुश्च शरीरे मे रोमहर्षश्च जायते ।
गाण्डीवं स्रंसते हस्तात्त्वक्चैव परिदह्यते ॥
१-३० ॥
vepathuśca śarīre me romaharṣaśca jāyate |
gāṇḍīvaṃ sraṃsate hastāttvakcaiva paridahyate ||
1-30 ||
मेरे शरीर में कम्प और रोमाञ्च हो रहा है, गाण्डीव धनुष हाथ से गिर रहा है, और त्वचा भी जल रही है।