The Great Liberation Tantra· 3.27 / 153

The Great Liberation Tantra3.27

3.27
तं दृष्ट्वा ते भयापन्नाः सिंहं दृष्ट्वा यथा गजाः । विद्रवन्ति च नश्यन्ति पतङ्गा इव पावके ॥२७॥
taṃ dṛṣṭvā te bhayāpannāḥ siṃhaṃ dṛṣṭvā yathā gajāḥ | vidravanti ca naśyanti pataṅgā iva pāvake ||27||
— उसे ; — देखकर ; — वे ; — भयभीत ; — सिंह को ; — देखकर ; — जैसे ; — हाथी ; — भागते हैं ; — और ; — नष्ट हो जाते हैं ; — पतंग ; — के समान ; — अग्नि में

उसे देखकर वे भयभीत हो जाते हैं, जैसे सिंह को देखकर हाथी; और वे भागते हैं तथा अग्नि में पतंगों के समान नष्ट हो जाते हैं।