The Great Liberation Tantra2.50
यथा गच्छन्ति सरितोऽवशेनापि सरित्पतिम् ।
तथार्चादीनि कर्माणि तदुद्देश्यानि पार्वति ॥५०॥
yathā gacchanti sarito'vaśenāpi saritpatim |
tathārcādīni karmāṇi taduddeśyāni pārvati ||50||
— जैसे ; — जाती हैं ; — नदियाँ ; — विवश होकर भी ; — समुद्र (नदीपति) की ओर ; — वैसे ही ; — अर्चा आदि ; — कर्म ; — उसी की ओर लक्षित ; — हे पार्वति हे पार्वति, जैसे नदियाँ विवश होकर भी समुद्र (नदीपति) की ओर जाती हैं, वैसे ही अर्चा आदि समस्त कर्म उसी की ओर लक्षित होते हैं।