The Great Liberation Tantra· 2.49 / 54

The Great Liberation Tantra2.49

2.49
यथा तवार्चनाद्ध्यानात् पूजनाज्जपनात् प्रिये । भवन्ति तुष्टाः सुन्दर्यस्तथा जानीहि सुव्रते ॥४९॥
yathā tavārcanāddhyānāt pūjanājjapanāt priye | bhavanti tuṣṭāḥ sundaryastathā jānīhi suvrate ||49||
— जैसे ; — तुम्हारी अर्चना से ; — ध्यान से ; — पूजन से ; — जप से ; — हे प्रिये ; — होती हैं ; — सन्तुष्ट ; — सुन्दरी (देवियाँ) ; — वैसे ही ; — जान ; — हे सुव्रते

हे सुव्रते, जैसे तुम्हारी अर्चना, ध्यान, पूजन और जप से सुन्दरी देवियाँ सन्तुष्ट होती हैं, वैसा ही (उसके विषय में भी) जान।