The Great Liberation Tantra· 2.51 / 54

The Great Liberation Tantra2.51

2.51
यो यो यान् यान् यजेद्देवान् श्रद्धया यद्यदाप्तये । तत्तद्ददाति सोऽध्यक्षस्तैस्तैर्देवगणैः शिवे ॥५१॥
yo yo yān yān yajeddevān śraddhayā yadyadāptaye | tattaddadāti so'dhyakṣastaistairdevagaṇaiḥ śive ||51||
— जो-जो ; — जिन-जिन (देवों को) ; — पूजे, देवों को ; — श्रद्धा से ; — जिस-जिस की प्राप्ति के लिए ; — वह-वह प्रदान करता है ; — वह ; — अध्यक्ष ; — उन-उन देव-गणों के द्वारा ; — हे शिवे

हे शिवे, जो-जो जिन-जिन देवों को श्रद्धा से जिस-जिस की प्राप्ति के लिए पूजता है, वह अध्यक्ष उन-उन देव-गणों के द्वारा उसे वह-वह प्रदान करता है।