The Great Liberation Tantra· 1.32 / 72

The Great Liberation Tantra1.32

1.32
त्यक्तुं कर्तुं न चार्हन्ति सदा कातरचेतसः । वेदार्थयुक्तशास्त्राणि स्मृतिरूपाणि भूतले ॥३२॥
tyaktuṃ kartuṃ na cārhanti sadā kātaracetasaḥ | vedārthayuktaśāstrāṇi smṛtirūpāṇi bhūtale ||32||
— छोड़ने के लिए ; — करने के लिए ; — नहीं ; — और ; — समर्थ हैं ; — सदा ; — भयभीत-चित्त ; — वेदार्थ से युक्त शास्त्रों को ; — स्मृति-रूप को ; — पृथ्वी पर

और सदा भयभीत-चित्त होकर वे उसे न छोड़ सके, न कर सके। तब (आपने) वेदार्थ से युक्त, स्मृति-रूप शास्त्रों को पृथ्वी पर —