The Great Liberation Tantra1.33
तदा त्वं प्रकटीकृत्य तपः स्वाध्यायदुर्बलान् ।
लोकानतारयः पापात् दुःखशोकामयप्रदात् ॥३३॥
tadā tvaṃ prakaṭīkṛtya tapaḥ svādhyāyadurbalān |
lokānatārayaḥ pāpāt duḥkhaśokāmayapradāt ||33||
— तब ; — तुम ; — प्रकट करके ; — तप से ; — स्वाध्याय में दुर्बलों को ; — लोकों को ; — तार दिया ; — पाप से ; — दुःख, शोक और रोग देने वाले से तब आपने (उन्हें) प्रकट करके, तप-स्वाध्याय में दुर्बल लोगों को दुःख, शोक और रोग देने वाले पाप से तार दिया।