The Great Liberation Tantra· 1.31 / 72

The Great Liberation Tantra1.31

1.31
बहुक्लेशकरं कर्म वैदिकं भूरिसाधनम् । कर्तुं न योग्या मनुजाश्चिन्ताव्याकुलमानसाः ॥३१॥
bahukleśakaraṃ karma vaidikaṃ bhūrisādhanam | kartuṃ na yogyā manujāścintāvyākulamānasāḥ ||31||
— बहुत क्लेशकारी ; — कर्म ; — वैदिक ; — प्रचुर साधनों की अपेक्षा रखने वाला ; — करने के लिए ; — नहीं ; — योग्य ; — मनुष्य ; — चिन्ता से व्याकुल-मन

वैदिक कर्म बहुत क्लेशकारी और प्रचुर साधनों की अपेक्षा रखने वाला था; चिन्ता से व्याकुल-मन मनुष्य उसे करने में योग्य न रहे,