The Great Liberation Tantra· 1.30 / 72

The Great Liberation Tantra1.30

1.30
कृते व्यतीते त्रेतायां दृष्ट्वा धर्मव्यतिक्रमम् । वेदोक्तकर्मभिर्मर्त्या न शक्ताः स्वेष्टसाधने ॥३०॥
kṛte vyatīte tretāyāṃ dṛṣṭvā dharmavyatikramam | vedoktakarmabhirmartyā na śaktāḥ sveṣṭasādhane ||30||
— कृत युग के ; — बीत जाने पर ; — त्रेता में ; — देखकर ; — धर्म के व्यतिक्रम को ; — वेदोक्त कर्मों से ; — मर्त्य, मनुष्य ; — नहीं ; — समर्थ ; — अपने अभीष्ट के साधन में

कृत युग के बीत जाने पर, त्रेता में धर्म का व्यतिक्रम देखकर, मनुष्य वेदोक्त कर्मों से अपने अभीष्ट की सिद्धि में समर्थ न रहे।