ब्राह्मणाः क्षत्रिया वैश्याः शूद्राः स्वाचारवर्तिनः ।
स्वैः स्वैर्धर्मैर्यजन्तस्ते निस्तारपदवीं गताः ॥२९॥
brāhmaṇāḥ kṣatriyā vaiśyāḥ śūdrāḥ svācāravartinaḥ |
svaiḥ svairdharmairyajantaste nistārapadavīṃ gatāḥ ||29||
ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य और शूद्र अपने-अपने आचार में स्थित रहकर, अपने-अपने धर्मों से यज्ञ करते हुए, निस्तार के मार्ग को प्राप्त हुए।