The Great Liberation Tantra· 1.29 / 72

The Great Liberation Tantra1.29

1.29
ब्राह्मणाः क्षत्रिया वैश्याः शूद्राः स्वाचारवर्तिनः । स्वैः स्वैर्धर्मैर्यजन्तस्ते निस्तारपदवीं गताः ॥२९॥
brāhmaṇāḥ kṣatriyā vaiśyāḥ śūdrāḥ svācāravartinaḥ | svaiḥ svairdharmairyajantaste nistārapadavīṃ gatāḥ ||29||
— ब्राह्मण ; — क्षत्रिय ; — वैश्य ; — शूद्र ; — अपने आचार में स्थित ; — अपने ; — अपने धर्मों से ; — यज्ञ करते हुए ; — वे ; — निस्तार के मार्ग को ; — प्राप्त हुए

ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य और शूद्र अपने-अपने आचार में स्थित रहकर, अपने-अपने धर्मों से यज्ञ करते हुए, निस्तार के मार्ग को प्राप्त हुए।