ईशानः सेन्दुवामश्रवणपरिगतो बीजमन्यन्महेशि
द्वन्द्वं ते मन्दचेता यदि जपति जनो वारमेकं कदाचित् ।
जित्वा वाचामधीशं धनमपि च चिरं मोहयन्नम्बुजाक्षीवृन्दं
चन्द्रार्धचूडे प्रभवति स महाघोरबालावतंसे ॥२॥
īśānaḥ sendu-vāma-śravaṇa-parigato bījam anyan maheśi |
dvandvaṃ te manda-cetā yadi japati jano vāram ekaṃ kadācit |
jitvā vācām adhīśaṃ dhanam api ca ciraṃ mohayann ambujākṣī-vṛndaṃ |
candrārdha-cūḍe prabhavati sa mahāghora-bālāvataṃse ||2||
śārdūlavikrīḍita
हे महेशी, हे अर्धचन्द्र-मुकुटधारिणी, हे बालकों की खोपड़ियों से सुशोभित महाघोरा! यदि कोई मन्दबुद्धि मनुष्य भी कभी एक बार तेरे दूसरे युगल बीज को — ईशान (ह) को अर्धचन्द्र और वाम-कर्ण से युक्त करके, दोहरे रूप में — जप ले, तो वह वाणी के स्वामी बृहस्पति को भी जीत लेता है, चिरकाल तक धन-सम्पदा पाता है, और कमल-नयना नारियों के समूह को मोहित कर लेता है।