न हि वर्णविभेदेन देहभेदेन वा भवेत् ।
परत्वं निष्कलत्वेन सकलत्वे न तद्भवेत् ॥६॥
na hi varṇavibhedena dehabhedena vā bhavet |
paratvaṃ niṣkalatvena sakalatve na tad bhavet
anuṣṭubh
— क्योंकि नहीं (अव्यय); — वर्णों/रंगों के भेद से (करण कारक — समासगत); — देहों के भेद से (करण कारक — समासगत); — अथवा (अव्यय); — हो सकता है (विधि लिङ्); — परत्व, सर्वोच्चता (कर्ता कारक); — निष्कलत्व (निरंशता) से (करण कारक); — सकलत्व (अंशयुक्तता) में (अधिकरण कारक); — वह नहीं हो सकता
वर्ण-भेद से अथवा देह-भेद से परत्व सम्भव नहीं है; निष्कल (निरंश) होने से ही परत्व है — सकल (सावयव) अवस्था में वह नहीं हो सकता।