The Essence of the Tantra· 9.50 / 53

The Essence of the Tantra9.50

9.50

यच् च सर्वान्तर्भूतं पूर्णरूपं तत् तुर्यातीतं सर्वातीतं महाप्रचयं च निरूपयन्ति

Transliteration (IAST)

yac ca sarvāntarbhūtaṃ pūrṇarūpaṃ tat turyātītaṃ sarvātītaṃ mahāpracayaṃ ca nirūpayanti

— सर्व-अन्तर्भूत (जिसमें सब समाहित है) ; — पूर्ण-रूप ; — तुर्यातीत — तुर्य से परे ; — सर्वातीत — सबसे परे ; — महाप्रचय — महान् संचय ; — निरूपित करते हैं

और जो सर्व-अन्तर्भूत पूर्ण-रूप है, उसे 'तुर्यातीत', 'सर्वातीत' एवं 'महाप्रचय' निरूपित करते हैं।