The Essence of the Tantra· 9.49 / 53

The Essence of the Tantra9.49

9.49

अन्वर्थं चात्र दर्शितं तन्त्रालोके श्लोकवार्त्तिके च

Transliteration (IAST)

anvarthaṃ cātra darśitaṃ tantrāloke ślokavārttike ca

— अन्वर्थ — नामों की अर्थ-अनुरूपता ; — यहाँ, इस विषय में ; — दिखायी गयी ; — तन्त्रालोक में ; — श्लोकवार्त्तिक में (पद्य-वृत्ति में)

और इन नामों की अन्वर्थता यहाँ तन्त्रालोक तथा श्लोकवार्त्तिक में दिखायी गयी है।