बुद्धितत्त्वात् अहङ्कारो येन बुद्धिप्रतिबिम्बिते वेद्यसम्पर्के कलुषे पुम्प्रकाशे अनात्मनि आत्माभिमानः शुक्तौ रजताभिमानवत्
Transliteration (IAST)
buddhitattvāt ahaṅkāro yena buddhipratibimbite vedyasamparke kaluṣe pumprakāśe anātmani ātmābhimānaḥ śuktau rajatābhimānavat
बुद्धि-तत्त्व से अहङ्कार (उत्पन्न होता है), जिससे बुद्धि में प्रतिबिम्बित, वेद्य के सम्पर्क से कलुष पुम्-प्रकाश में, अनात्मा में आत्म-अभिमान (होता है) — जैसे शुक्ति (सीप) में रजत का अभिमान।