The Essence of the Tantra· 8.68 / 93

The Essence of the Tantra8.68

8.68

बुद्धितत्त्वात् अहङ्कारो येन बुद्धिप्रतिबिम्बिते वेद्यसम्पर्के कलुषे पुम्प्रकाशे अनात्मनि आत्माभिमानः शुक्तौ रजताभिमानवत्

Transliteration (IAST)

buddhitattvāt ahaṅkāro yena buddhipratibimbite vedyasamparke kaluṣe pumprakāśe anātmani ātmābhimānaḥ śuktau rajatābhimānavat

— बुद्धि-तत्त्व से ; — अहङ्कार (अहं-कर्ता तत्त्व) ; — बुद्धि में प्रतिबिम्बित ; — वेद्य के सम्पर्क से कलुष ; — अनात्मा में आत्म-अभिमान ; — शुक्ति (सीप) में रजत के अभिमान के समान

बुद्धि-तत्त्व से अहङ्कार (उत्पन्न होता है), जिससे बुद्धि में प्रतिबिम्बित, वेद्य के सम्पर्क से कलुष पुम्-प्रकाश में, अनात्मा में आत्म-अभिमान (होता है) — जैसे शुक्ति (सीप) में रजत का अभिमान।