The Essence of the Tantra· 8.23 / 93

The Essence of the Tantra8.23

8.23

स च मलो विज्ञानकेवले विद्यमानो ध्वंसोन्मुख इति न स्वकार्यं कर्म आप्यायति

Transliteration (IAST)

sa ca malo vijñānakevale vidyamāno dhvaṃsonmukha iti na svakāryaṃ karma āpyāyati

— विज्ञानकेवल के विषय में (विज्ञानाकल में) ; — विद्यमान रहते हुए भी ; — ध्वंस-उन्मुख — विनाश की ओर ; — अपना कार्य ; — आप्यायित (पोषित) करता है

और वह मल विज्ञानकेवल में विद्यमान रहते हुए भी ध्वंस-उन्मुख (विनाश की ओर) होने से अपने कार्य कर्म को नहीं आप्यायित (पोषित) करता।