The Essence of the Tantra· 8.2 / 93

The Essence of the Tantra8.2

8.2

यत् तु कतिपयकतिपयभेदानुगतं रूपं तत् तत्त्वं यथा पृथिवी नाम द्युतिकाठिन्यस्थौल्यादिरूपा कालाग्निप्रभृतिवीरभद्रान्तभुवनेशाधिष्ठितसमस्तब्रह्माण्डानुगता

Transliteration (IAST)

yat tu katipayakatipayabhedānugataṃ rūpaṃ tat tattvaṃ yathā pṛthivī nāma dyutikāṭhinyasthaulyādirūpā kālāgniprabhṛtivīrabhadrāntabhuvaneśādhiṣṭhitasamastabrahmāṇḍānugatā

— कुछ-कुछ (सीमित) भेदों में अनुगत ; — तत्त्व ; — पृथिवी (पृथिवी-तत्त्व) ; — द्युति, काठिन्य, स्थौल्य आदि रूप वाली ; — कालाग्नि से वीरभद्र-पर्यन्त भुवनेशों से अधिष्ठित समस्त ब्रह्माण्डों में अनुगत

किन्तु जो रूप कुछ-कुछ (सीमित) भेदों में अनुगत है, वह तत्त्व है — जैसे 'पृथिवी' नामक (तत्त्व), जो द्युति, काठिन्य, स्थौल्य आदि रूप वाला है, तथा कालाग्नि से लेकर वीरभद्र-पर्यन्त भुवनेशों से अधिष्ठित समस्त ब्रह्माण्डों में अनुगत है।