The Essence of the Tantra· 8.19 / 93

The Essence of the Tantra8.19

8.19

तत्र लोलिको ऽपूर्णम् अन्यतारूपः परिस्पन्दः अकर्मकम् अभिलाषमात्रम् एव भविष्यद् अवच्छेदयोग्यतेति न मलः पुंसस् तत्त्वान्तरम्

Transliteration (IAST)

tatra loliko 'pūrṇam anyatārūpaḥ parispandaḥ akarmakam abhilāṣamātram eva bhaviṣyad avacchedayogyateti na malaḥ puṃsas tattvāntaram

— लोलिक — लालसा, लोलुपता ; — अपूर्ण (अवस्था) ; — अन्यता-रूप (भेद-भाव रूप) ; — परिस्पन्द — स्पन्दन, संक्षोभ ; — अभिलाष-मात्र — केवल इच्छा ; — अवच्छेद की योग्यता (भविष्य में सीमित होने की) ; — मल — अशुद्धि ; — तत्त्वान्तर — पृथक् तत्त्व

उसमें 'लोलिक' (लालसा) अपूर्ण, अन्यता-रूप परिस्पन्द है; अकर्मक (विषय-रहित), केवल अभिलाष-मात्र, भविष्य में अवच्छेद की योग्यता वाला है। अतः मल पुरुष से भिन्न कोई तत्त्वान्तर (पृथक् तत्त्व) नहीं है।