तद्ग्रासकवह्निप्रशमे व्यानोदये सर्वावच्छेदवन्ध्यः स्फुरति
Transliteration (IAST)
tadgrāsakavahnipraśame vyānodaye sarvāvacchedavandhyaḥ sphurati
उस ग्रासक वह्नि के प्रशम (शान्त होने) पर, व्यान के उदय से (साधक) समस्त अवच्छेद से रहित होकर स्फुरित होता है।