The Essence of the Tantra· 3.5 / 34

The Essence of the Tantra3.5

3.5

शब्दो ऽपि न मुख्यः को ऽपि वक्ति इति आगच्छन्त्या इव प्रतिश्रुत्कायाः श्रवणात्

Transliteration (IAST)

śabdo 'pi na mukhyaḥ ko 'pi vakti iti āgacchantyā iva pratiśrutkāyāḥ śravaṇāt

— शब्द ; — मुख्य — वास्तविक ; — 'कोई बोल रहा है' ; — मानो (अन्य दिशा से) आती हुई ; — प्रतिध्वनि की ; — श्रवण के कारण

शब्द भी मुख्य नहीं है, क्योंकि 'कोई बोल रहा है' इस प्रकार मानो अन्यत्र से आती हुई प्रतिध्वनि सुनाई देती है।