The Essence of the Tantra· 22.43 / 53

The Essence of the Tantra22.43

22.43

तज्ज्ञः शास्त्रे मुक्तः परकुलविज्ञानभाजनं गर्भः । शून्याशून्यालयं कुर्याद् एकदण्डे ऽनलानिलौ

Transliteration (IAST)

tajjñaḥ śāstre muktaḥ parakulavijñānabhājanaṃ garbhaḥ | śūnyāśūnyālayaṃ kuryād ekadaṇḍe 'nalānilau

— उसका ज्ञाता ; — शास्त्र में (शास्त्र के अनुसार) मुक्त ; — पर-कुल-विज्ञान का भाजन (पात्र) ; — गर्भ (आन्तर बीज) ; — शून्य एवं अशून्य के आलय (आश्रय) को बना ले ; — एक ही दण्ड (नाडी) में अनल एवं अनिल (अग्नि-वायु)

उसका ज्ञाता, शास्त्र में (शास्त्र के अनुसार) मुक्त, पर-कुल-विज्ञान का भाजन (पात्र) एवं गर्भ (आन्तर बीज) — शून्य एवं अशून्य के आलय (आश्रय) को (अपना धाम) बना ले, एक ही दण्ड (नाडी) में अनल एवं अनिल (अग्नि एवं वायु) को (संयुक्त करके)।