ज्योतिर् ध्वनिश् च यस्मात् सा मान्त्री व्याप्तिर् उच्यते परमा । कर्मणि कर्मणि विदुषः स्याज् जीवतो मुक्तिः
Transliteration (IAST)
jyotir dhvaniś ca yasmāt sā māntrī vyāptir ucyate paramā | karmaṇi karmaṇi viduṣaḥ syāj jīvato muktiḥ
क्योंकि उससे ज्योति एवं ध्वनि (प्रकट होती है), वह परमा मान्त्री व्याप्ति कही जाती है। (इससे) ज्ञानी (साधक) के लिए प्रत्येक कर्म में जीवित रहते हुए ही मुक्ति होती है।