तद्युगलमूर्ध्वधामप्रवेशसस्पन्दजातसङ्क्षोभम् । क्षुभ्नात्य् अनुचक्राण्य् अपि तानि तदा तन्मयानि न पृथक् तु
Transliteration (IAST)
tadyugalamūrdhvadhāmapraveśasaspandajātasaṅkṣobham | kṣubhnāty anucakrāṇy api tāni tadā tanmayāni na pṛthak tu
उस युगल के ऊर्ध्व-धाम में प्रवेश से, स्पन्द के साथ उत्पन्न संक्षोभ वाला (वह), अनुचक्रों को भी क्षुब्ध कर देता है; तब वे (अनुचक्र) भी उसमें तन्मय (होकर) पृथक् नहीं (रहते)।