तत्रापि च एकद्वित्र्यादिभेदेन समस्तव्यस्ततया क्वचित् कस्यचित् कदाचित् च तथा आश्वासोपलब्धेः विचित्रो भेदः
Transliteration (IAST)
tatrāpi ca ekadvitryādibhedena samastavyastatayā kvacit kasyacit kadācit ca tathā āśvāsopalabdheḥ vicitro bhedaḥ
और वहाँ भी एक-दो-तीन आदि भेद से, समस्त-व्यस्त रूप से, कहीं, किसी को, कभी — वैसी आश्वास (दृढ़ विश्वास) की उपलब्धि होने के कारण विचित्र भेद (है)।