पृथिव्यादिशक्तीनाम् अत्र अवस्थानेन शक्तितत्त्वे यावत् परस्पर्शो विद्यते स्पर्शस्य च सप्रतिघत्वम् इति तावति युक्तम् अण्डत्वम्
Transliteration (IAST)
pṛthivyādiśaktīnām atra avasthānena śaktitattve yāvat parasparśo vidyate sparśasya ca sapratighatvam iti tāvati yuktam aṇḍatvam
पृथिवी आदि शक्तियों के यहाँ शक्ति-तत्त्व में अवस्थान से जितना पर-स्पर्श (पारस्परिक स्पर्श) विद्यमान है, और स्पर्श का सप्रतिघत्व (प्रतिरोध-युक्तता) है, उतने में अण्डत्व (अण्ड होना) युक्त है।