The Essence of the Tantra· 10.9 / 18

The Essence of the Tantra10.9

10.9

शिवतत्त्वे शान्तातीता तस्योपदेशभावनार्चादौ कल्यमानत्वात्

Transliteration (IAST)

śivatattve śāntātītā tasyopadeśabhāvanārcādau kalyamānatvāt

— शिव-तत्त्व में ; — शान्तातीता-कला (शान्ता से परे की कला) ; — उपदेश, भावना, अर्चा आदि में ; — कल्यमान (परिगणित) होने के कारण

शिव-तत्त्व में शान्तातीता (कला है), क्योंकि वह उपदेश, भावना, अर्चा आदि में कल्यमान (परिगणित) होती है।