— निज (आन्तर) अशुद्धि (समासगत स्तम्भ); — असमर्थ, अक्षम (षष्ठी एकवचन — विशेषण); — कर्तव्यों में, करने योग्य कार्यों में (अधिकरण कारक बहुवचन); — अभिलाषी, इच्छुक (षष्ठी एकवचन); — जब (कालवाचक सम्बन्धवाचक अव्यय); — क्षोभ, अशान्ति, विक्षेप (कर्ता कारक); — विलीन हो जाए, समाप्त हो जाए (विधिलिङ्, इच्छार्थ क्रिया); — तब (कालवाचक नित्यसम्बन्धी अव्यय); — हो, हो सकता है (विधिलिङ्ग, तृ.पु.एक. √अस्); — परम पद, सर्वोच्च स्थिति (कर्ता कारक)
अपनी निज अशुद्धि से असमर्थ बना हुआ तथा कर्तव्यों की कामना करने वाला (जीव) — जब उसका क्षोभ विलीन हो जाए, तब परम पद की प्राप्ति होती है।