Stanzas on the Divine Pulsation · 1.14

Stanzas on the Divine Pulsation 1.14

1.14
अवस्थायुगलं चात्र कार्यकर्तृत्वशब्दितम् । कार्यता क्षयिणी तत्र कर्तृत्वं पुनरक्षयम् ॥१४॥
avasthā-yugalaṃ cātra kārya-kartṛtva-śabditam | kāryatā kṣayiṇī tatra kartṛtvaṃ punar akṣayam ||
anuṣṭubh
— दो अवस्थाओं का युग्म (कर्ता कारक — समासगत) ; — और (अव्यय) ; — यहाँ, इस (में) — अव्यय ; — कार्यता (कार्य-रूपता) तथा कर्तृत्व (कर्ता-रूपता) नामों से कहा गया (कर्ता कारक — समासगत) ; — कार्यता — कार्य होने की अवस्था (कर्ता कारक, स्त्रीलिङ्ग) ; — क्षयिणी — क्षयशील, नाशवान (विशेषण, स्त्रीलिङ्ग) ; — वहाँ, उस में (अव्यय) ; — कर्तृत्व — कर्ता होने की स्थिति (कर्ता कारक) ; — पुनः, फिर (अव्यय) ; — अक्षय — अनश्वर, अविनाशी (विशेषण)

यहाँ दो अवस्थाएँ कही गई हैं — कार्यता (कार्य-रूप) और कर्तृत्व (कर्ता-रूप); उनमें कार्यता क्षयिणी (नाशवान) है, परन्तु कर्तृत्व अक्षय (अविनाशी) है।