एतयैव दिशा दूष्यं स्वभावाद्यमसंशयम् ।
परानुमाने पक्षादौ धर्मादेर्भेद्यभेदिता ॥६१॥
etayaiva diśā dūṣyaṃ svabhāvādyamasaṃśayam |
parānumāne pakṣādau dharmāderbhedyabheditā
इसी दिशा (तर्क) से स्वभाव आदि (से अनुमान) निःसंदेह दूषणीय है; और पर-अनुमान (दूसरे के लिए अनुमान) में पक्ष आदि के विषय में धर्म आदि की भेद्य-भेदिता (विशेष्य-विशेषक भाव भी विघटित होती है)।