शक्ताशक्तविकल्पैर्हि दीपज्वालाद्युदाहृतैः ।
स्थिरता नोपपन्ना ते प्रत्यक्षेणापिच स्थिता ॥९३॥
śaktāśaktavikalpairhi dīpajvālādyudāhṛtaiḥ |
sthiratā nopapannā te pratyakṣeṇāpica sthitā
शक्त-अशक्त के विकल्पों से, जो दीप-ज्वाला आदि से उदाहृत हैं, (वस्तुओं की) स्थिरता खण्डित नहीं होती; और प्रत्यक्ष से भी (उनकी) स्थिरता स्थित है।