The Vision of Śiva· 4.93 / 124

The Vision of Śiva4.93

4.93
शक्ताशक्तविकल्पैर्हि दीपज्वालाद्युदाहृतैः । स्थिरता नोपपन्ना ते प्रत्यक्षेणापिच स्थिता ॥९३॥
śaktāśaktavikalpairhi dīpajvālādyudāhṛtaiḥ | sthiratā nopapannā te pratyakṣeṇāpica sthitā
— शक्त-अशक्त के विकल्पों से ; — निश्चय ही ; — दीप-ज्वाला आदि से उदाहृत ; — स्थिरता ; — खण्डित नहीं ; — तुम्हारे लिए ; — प्रत्यक्ष से ; — और भी ; — स्थित

शक्त-अशक्त के विकल्पों से, जो दीप-ज्वाला आदि से उदाहृत हैं, (वस्तुओं की) स्थिरता खण्डित नहीं होती; और प्रत्यक्ष से भी (उनकी) स्थिरता स्थित है।