The Vision of Śiva· 4.92 / 124

The Vision of Śiva4.92

4.92
तस्मान्न भेदे भावानां तद्ग्रहाद्यपि युज्यते । क्षणभंगपरामर्शादप्येतदुपपद्यते ॥९२॥
tasmānna bhede bhāvānāṃ tadgrahādyapi yujyate | kṣaṇabhaṃgaparāmarśādapyetadupapadyate
— इसलिए ; — नहीं ; — भेद होने पर ; — भावों के ; — उनका ग्रहण आदि भी ; — संगत ; — क्षण-भंग के परामर्श से ; — भी ; — यह ; — उपपन्न होता है

इसलिए भावों के भेद होने पर उनका ग्रहण आदि भी संगत नहीं; और क्षण-भंग (क्षणिकता) के परामर्श से भी यही (निष्कर्ष — एकता की अनिवार्यता) सिद्ध होता है।