The Vision of Śiva· 4.94 / 124

The Vision of Śiva4.94

4.94
स्थिरत्वं क्षणिकत्वं च प्रमाणां चिन्तया स्थितम् । अप्यसंवादरूपं च विरुद्धं तत्कथं भवेत् ॥९४॥
sthiratvaṃ kṣaṇikatvaṃ ca pramāṇāṃ cintayā sthitam | apyasaṃvādarūpaṃ ca viruddhaṃ tatkathaṃ bhavet
— स्थिरत्व ; — और क्षणिकत्व ; — प्रमाणों के ; — विचार से ; — स्थित ; — भी ; — परस्पर असंवादी (विसंगत) रूप ; — और ; — विरुद्ध ; — वह ; — कैसे हो

(यदि कहो कि) स्थिरत्व और क्षणिकत्व (दोनों) प्रमाणों के विचार से स्थित हैं — (तो भी) परस्पर असंवादी (विसंगत) और विरुद्ध-रूप होकर वह (दोनों एक साथ) कैसे हो (जब तक एक चित् में समाहित न हों)?