The Vision of Śiva· 4.95 / 124

The Vision of Śiva4.95

4.95
यावन्न सर्वभावानामेकत्वेन व्यवस्थितिः । परेण क्षणभंगस्य परामर्शागमः कुतः ॥९५॥
yāvanna sarvabhāvānāmekatvena vyavasthitiḥ | pareṇa kṣaṇabhaṃgasya parāmarśāgamaḥ kutaḥ
— जब तक नहीं ; — समस्त भावों की ; — एकत्व से ; — व्यवस्थिति ; — विरोधी (बौद्ध) को ; — क्षण-भंग का ; — परामर्श का प्राप्त होना ; — कहाँ से

जब तक समस्त भावों की एकत्व से व्यवस्थिति न हो, तब तक विरोधी (बौद्ध) को क्षण-भंग का परामर्श (विचार) कहाँ से प्राप्त हो (— ऐसा परामर्श स्वयं एक अविच्छिन्न चित् की अपेक्षा रखता है)?