यावन्न सर्वभावानामेकत्वेन व्यवस्थितिः ।
परेण क्षणभंगस्य परामर्शागमः कुतः ॥९५॥
yāvanna sarvabhāvānāmekatvena vyavasthitiḥ |
pareṇa kṣaṇabhaṃgasya parāmarśāgamaḥ kutaḥ
जब तक समस्त भावों की एकत्व से व्यवस्थिति न हो, तब तक विरोधी (बौद्ध) को क्षण-भंग का परामर्श (विचार) कहाँ से प्राप्त हो (— ऐसा परामर्श स्वयं एक अविच्छिन्न चित् की अपेक्षा रखता है)?