शशशृङ्गादिके नापि स्याद्विभक्त्या समन्वयः ॥३२॥
śaśaśṛṅgādike nāpi syādvibhaktyā samanvayaḥ
शश-शृंग (खरगोश के सींग) आदि (असत् वस्तु) में भी विभक्त रूप से (पृथक् वस्तु के रूप में ज्ञान का) समन्वय नहीं हो सकता।
शश-शृंग (खरगोश के सींग) आदि (असत् वस्तु) में भी विभक्त रूप से (पृथक् वस्तु के रूप में ज्ञान का) समन्वय नहीं हो सकता।