The Vision of Śiva· 4.110 / 124

The Vision of Śiva4.110

4.110
वर्णनेन च चैतन्यमेतावन्मनसो यदि । स्वात्मशक्तिसमावेशादमूर्तावेशता कथम् ॥११०॥
varṇanena ca caitanyametāvanmanaso yadi | svātmaśaktisamāveśādamūrtāveśatā katham
— वर्णन से ; — और ; — चेतनता ; — इतनी ही ; — मन की ; — यदि ; — अपनी ही (चित्-) शक्ति के समावेश से ; — अमूर्त (चित्) का आवेश ; — कैसे

और यदि मन की चेतनता (केवल) इतनी ही, अर्थात् वर्णन-मात्र (है) — तो (यह भी) अपनी ही (चित्-) शक्ति के समावेश से (होती है); (अन्यथा) अमूर्त (चित्) का (विषयों में) आवेश कैसे (समझाया जाए)?