एकाधिष्ठानतो वापि तेषामपि न दूषणम् ॥९७॥
ekādhiṣṭhānato vāpi teṣāmapi na dūṣaṇam
— अथवा वैसा (मानकर) भी, उनके एक अधिष्ठान (शिव) के कारण उन (परमाणुओं) में भी कोई दूषण नहीं।
— अथवा वैसा (मानकर) भी, उनके एक अधिष्ठान (शिव) के कारण उन (परमाणुओं) में भी कोई दूषण नहीं।