The Vision of Śiva· 3.97 / 99

The Vision of Śiva3.97

3.97
एकाधिष्ठानतो वापि तेषामपि न दूषणम् ॥९७॥
ekādhiṣṭhānato vāpi teṣāmapi na dūṣaṇam
— एक अधिष्ठान के कारण ; — अथवा वैसा (मानकर) भी ; — उन (परमाणुओं) में भी ; — नहीं ; — दूषण

— अथवा वैसा (मानकर) भी, उनके एक अधिष्ठान (शिव) के कारण उन (परमाणुओं) में भी कोई दूषण नहीं।