The Vision of Śiva· 3.96 / 99

The Vision of Śiva3.96

3.96
एकस्मिन्नेव देहे तु विभेदात्परमाणुगात् ॥९६॥
ekasminneva dehe tu vibhedātparamāṇugāt
— एक ही में ; — देह में ; — किन्तु ; — विभेद के कारण ; — परमाणु तक पहुँचने वाले

किन्तु एक ही देह में परमाणु तक पहुँचने वाले विभेद के कारण (नानात्व का आक्षेप किया जा सकता है) —