The Vision of Śiva· 3.20 / 99

The Vision of Śiva3.20

3.20
तथेच्छया समाविष्टस्तथा शक्तित्रयेण च । तथा तथा स्थितो भावैरतः सर्वं शिवात्मकम् ॥२०॥
tathecchayā samāviṣṭastathā śaktitrayeṇa ca | tathā tathā sthito bhāvairataḥ sarvaṃ śivātmakam
— वैसे ही ; — इच्छा से ; — समाविष्ट ; — वैसे ; — शक्ति-त्रय से ; — और ; — वैसे-वैसे ; — स्थित ; — भावों के रूप में ; — इसलिए ; — सब कुछ ; — शिवात्मक

वैसे ही (शिव) इच्छा से तथा शक्ति-त्रय से समाविष्ट होकर, उन-उन भावों के रूप में वैसे-वैसे स्थित रहता है; इसलिए सब कुछ शिवात्मक है।