तथेच्छया समाविष्टस्तथा शक्तित्रयेण च ।
तथा तथा स्थितो भावैरतः सर्वं शिवात्मकम् ॥२०॥
tathecchayā samāviṣṭastathā śaktitrayeṇa ca |
tathā tathā sthito bhāvairataḥ sarvaṃ śivātmakam
वैसे ही (शिव) इच्छा से तथा शक्ति-त्रय से समाविष्ट होकर, उन-उन भावों के रूप में वैसे-वैसे स्थित रहता है; इसलिए सब कुछ शिवात्मक है।