The Vision of Śiva2.60
स्फोटस्यासत्यरूपैर्हि पदाद्यैर्व्यङ्ग्यता कथम् ।
पश्यन्त्याः सत्यरूपाया असत्यैर्व्यङ्ग्यता न च ॥६०॥
sphoṭasyāsatyarūpairhi padādyairvyaṅgyatā katham |
paśyantyāḥ satyarūpāyā asatyairvyaṅgyatā na ca
— स्फोट की ; — असत्य-रूप (साधनों) से ; — निश्चय ही ; — पद आदि से ; — व्यंग्यता (अभिव्यक्ति) ; — कैसे ; — पश्यन्ती की ; — सत्य-रूप की ; — असत्य (साधनों) से ; — व्यंग्यता ; — नहीं ही स्फोट की असत्य-रूप पद आदि (साधनों) से व्यंग्यता (अभिव्यक्ति) कैसे हो? और सत्य-रूप पश्यन्ती की असत्य (साधनों) से व्यंग्यता तो (सम्भव) नहीं।