गृह्णात्यथाविद्यया वा साप्यस्याः कथमास्थिता ॥२२॥
gṛhṇātyathāvidyayā vā sāpyasyāḥ kathamāsthitā
— ग्रहण करती है, अथवा अविद्या से? और वह (अविद्या) भी इसमें (शुद्ध पश्यन्ती में) कैसे ठहरी?
— ग्रहण करती है, अथवा अविद्या से? और वह (अविद्या) भी इसमें (शुद्ध पश्यन्ती में) कैसे ठहरी?