The Vision of Śiva· 2.22 / 90

The Vision of Śiva2.22

2.22
गृह्णात्यथाविद्यया वा साप्यस्याः कथमास्थिता ॥२२॥
gṛhṇātyathāvidyayā vā sāpyasyāḥ kathamāsthitā
— ग्रहण करती है ; — अथवा ; — अविद्या से ; — अथवा ; — वह भी ; — इसकी (पश्यन्ती में) ; — कैसे ; — ठहरी

— ग्रहण करती है, अथवा अविद्या से? और वह (अविद्या) भी इसमें (शुद्ध पश्यन्ती में) कैसे ठहरी?