The Vision of Śiva· 2.21 / 90

The Vision of Śiva2.21

2.21
यद्याभासान्बहिर्भूतांस्तत्सतोऽप्यसतोऽपि वा ॥२१॥
yadyābhāsānbahirbhūtāṃstatsato'pyasato'pi vā
— यदि ; — आभासों को ; — बाह्य-भूत ; — तो ; — सत् (के रूप में) ; — भी ; — असत् (के रूप में) ; — भी ; — अथवा

यदि (पश्यन्ती) बाह्य-भूत आभासों को (ग्रहण करती है), तो उन्हें सत्-रूप में या असत्-रूप में —