वर्तमानसमारूढा क्रिया पश्यन्त्युदाहृता ॥२०॥
vartamānasamārūḍhā kriyā paśyantyudāhṛtā
(किन्तु उनके मत में) वर्तमान (क्षण) पर समारूढ़ क्रिया ही 'पश्यन्ती' कही गई है (— इसी की अब हम परीक्षा करते हैं)।
(किन्तु उनके मत में) वर्तमान (क्षण) पर समारूढ़ क्रिया ही 'पश्यन्ती' कही गई है (— इसी की अब हम परीक्षा करते हैं)।