एवं सर्वसमुत्पत्तिकाले शक्तित्रयात्मता ।
न निवृत्ता, नचौन्मुख्यं निवृत्तं, नापि निर्वृतिः ॥२२॥
evaṃ sarvasamutpattikāle śaktitrayātmatā |
na nivṛttā, nacaunmukhyaṃ nivṛttaṃ, nāpi nirvṛtiḥ
इस प्रकार समस्त (वस्तुओं की) उत्पत्ति के समय शक्ति-त्रय-स्वरूपता निवृत्त नहीं होती, न उन्मुखता निवृत्त होती है, न ही निर्वृति।