यदेकतरनिर्याणे कार्यं जातु न जायते ।
तस्मात्सर्वपदार्थानां सामरस्यमवस्थितम् ॥२३॥
yadekataraniryāṇe kāryaṃ jātu na jāyate |
tasmātsarvapadārthānāṃ sāmarasyamavasthitam
— क्योंकि, जिस कारण; — किसी एक के भी निकल जाने पर; — कार्य; — कभी; — नहीं; — उत्पन्न होता; — इसलिए; — समस्त पदार्थों का; — सामरस्य (समता-रस); — अवस्थित
क्योंकि उनमें से किसी एक के भी निकल जाने पर कार्य कभी उत्पन्न नहीं होता — इसलिए समस्त पदार्थों का सामरस्य (समता-रस) अवस्थित है।