The Vision of Śiva· 1.23 / 49

The Vision of Śiva1.23

1.23
यदेकतरनिर्याणे कार्यं जातु न जायते । तस्मात्सर्वपदार्थानां सामरस्यमवस्थितम् ॥२३॥
yadekataraniryāṇe kāryaṃ jātu na jāyate | tasmātsarvapadārthānāṃ sāmarasyamavasthitam
— क्योंकि, जिस कारण ; — किसी एक के भी निकल जाने पर ; — कार्य ; — कभी ; — नहीं ; — उत्पन्न होता ; — इसलिए ; — समस्त पदार्थों का ; — सामरस्य (समता-रस) ; — अवस्थित

क्योंकि उनमें से किसी एक के भी निकल जाने पर कार्य कभी उत्पन्न नहीं होता — इसलिए समस्त पदार्थों का सामरस्य (समता-रस) अवस्थित है।