The Heart of Recognition · 1.16

The Heart of Recognition 1.16

1.16
चिदानन्दलाभे देहादिषु चेत्यमानेष्वपि चिदैकात्म्यप्रतिपत्तिदार्ढ्यं जीवन्मुक्तिः ॥१६॥
cid-ānanda-lābhe dehādiṣu cetyamāneṣv api cid-aikātmya-pratipatti-dārḍhyaṃ jīvan-muktiḥ
sūtra
— चित्-आनन्द की प्राप्ति होने पर ; — देह आदि (विषयों) में ; — विषय-रूप में अनुभूत होते हुए भी ; — भी, यद्यपि ; — चित् के साथ ऐक्य-प्रतिपत्ति की दृढ़ता ; — जीवन्मुक्ति — जीते-जी मुक्ति

चिदानन्द की प्राप्ति होने पर देह आदि के विषय-रूप में अनुभूत होते रहने पर भी चिति के साथ एकात्म्य-प्रतिपत्ति की दृढ़ता ही जीवन्मुक्ति है।