1.15 बललाभे विश्वमात्मसात्करोति ॥१५॥ bala-lābhe viśvam ātmasāt karoti sūtra bala-lābhe — (चिति के) बल की प्राप्ति होने पर ; viśvam — विश्व को ; ātmasāt — आत्म-रूप, स्वयं के अनुरूप ; karoti — कर लेती है (चिति के पूर्ण) बल की प्राप्ति होने पर वह सम्पूर्ण विश्व को आत्म-रूप कर लेती है।