Parātrīśikā· 1.2 / 36

Parātrīśikā1.2

1.2
एतद् गुह्यं महागुह्यं कथयस्व मम प्रभो । हृदयस्था तु या शक्तिः कौलिनी कुलनायिका ॥२॥
etad guhyaṃ mahāguhyaṃ kathayasva mama prabho | hṛdayasthā tu yā śaktiḥ kaulinī kulanāyikā
— यह ; — गुह्य — रहस्यमय (उपदेश) ; — महागुह्य — महान् रहस्य ; — कहिए, बताइए (मुझे) ; — मुझे, मेरे लिए ; — हे प्रभो, हे स्वामी ; — हृदय में स्थित ; — किन्तु, और ; — जो (शक्ति) ; — शक्ति ; — कौलिनी — कुल की शक्ति ; — कुलनायिका — कुल की स्वामिनी

हे प्रभो, मुझे यह गुह्य, यह महागुह्य कहिए — और (बताइए) वह शक्ति जो हृदय में स्थित है, वह कौलिनी, कुल की नायिका।