Parātrīśikā1.16
आगत्य समयं दत्त्वा भैरवेण प्रचोदिताः ।
यच्छन्ति परमां सिद्धिं फलं यद् वा समीहितम् ॥१६॥
āgatya samayaṃ dattvā bhairaveṇa pracoditāḥ |
yacchanti paramāṃ siddhiṃ phalaṃ yad vā samīhitam
— आकर, उपस्थित होकर ; — समय — प्रतिज्ञा, संकल्प (समय) ; — देकर, प्रदान करके ; — भैरव द्वारा ; — प्रेरित, उद्बुद्ध किए गए ; — प्रदान करते हैं, देते हैं ; — परम, सर्वोच्च ; — सिद्धि — प्राप्ति, पूर्णता ; — फल — परिणाम ; — जो भी ; — अथवा ; — अभीष्ट, इच्छित (वे सब) आकर तथा समय (प्रतिज्ञा) देकर, भैरव द्वारा प्रेरित होकर, परम सिद्धि प्रदान करते हैं, अथवा जो भी फल अभीष्ट हो (वह देते हैं)।