एवं रूप्यविदाभावरूपा शुक्तिमतिर् भवेत्
न त्व् आद्यरजतज्ञप्तेः स्याद् अप्रामाण्यवेदिका ॥१२॥
evaṃ rūpyavidābhāvarūpā śuktimatir bhavet
na tv ādyarajatajñapteḥ syād aprāmāṇyavedikā
— इसी प्रकार; — रजत-ज्ञान के अभाव-रूप; — शुक्ति का ज्ञान; — हो (विधि, √भू); — किन्तु नहीं; — मूल रजत-ज्ञान का; — होगा (विधि, √अस्); — अप्रमाणता का बोधक
इसी प्रकार शुक्ति का ज्ञान रजत-ज्ञान के अभाव-रूप तो होगा; किन्तु वह मूल रजत-ज्ञान की अप्रमाणता का बोधक नहीं होगा।