Verses on the Recognition of the Lord· 3.6 / 7

Verses on the Recognition of the Lord3.6

3.6
एवम् अन्योन्यभिन्नानाम् अपरस्परवेदिनाम् ज्ञानानाम् अनुसंधानजन्मा नश्येज् जनस्थितिः ॥६॥
evam anyonyabhinnānām aparasparavedinām jñānānām anusaṃdhānajanmā naśyej janasthitiḥ
— इस प्रकार, इस मत पर ; — परस्पर भिन्न (ज्ञानों) के ; — एक-दूसरे को न जानने वाले (ज्ञानों) के ; — ज्ञानों के ; — अनुसन्धान (संयोजन) से उत्पन्न ; — नष्ट हो जाए (विधि, √नश्) ; — जन-स्थिति — लोक-व्यवहार

इस प्रकार यदि ज्ञान परस्पर भिन्न हों और एक-दूसरे को न जानते हों, तो अनुसन्धान से उत्पन्न होने वाली लोक-स्थिति (व्यवहार) नष्ट हो जाएगी।